गोल्ड ज्वेलरी नहीं खरीद रहे लोग, 15% गिरी खरीदारी, कारण क्या-क्या हैं?


Gold Jewellery: महंगाई के इस दौर में सोना कभी महंगा हो रहा है तो कभी सस्ता. अब गोल्ड ज्वेलरी की खरीद को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है. ये रिपोर्ट वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने जारी की है, जिसमें बताया गया है कि अप्रैल से जून 2026 के तीन महीने में भारत में गोल्ड ज्वेलरी की खरीदारी पिछले साल के मुकाबले 15% से कम होकर 75 टन रह गई है. वहीं, दुनिया भर में भी ज्वेलरी की मांग 278 टन रही, जो कोरोना महामारी के बाद दूसरे तीन महीने का सबसे कमजोर लेवल है. 

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की लगातार ज्यादा कीमतें हैं. महंगा सोना होने के वजह से कई लोगों ने ज्वेलरी खरीदने का प्लान टाल दिया. जिन लोगों ने खरीदारी की, उन्होंने भारी ज्वेलरी की जगह हल्के वजन वाले ज्वेलरी को ज्यादा पसंद किया. लेकिन पहले तीन महीने के मुकाबले दूसरे तीन महीने में भारत में मांग 14% ज्यादा हुई, लेकिन साल के हिसाब से इसमें कमी हो गई है. 

कम सोना खरीदा, लेकिन ज्यादा पैसे दिए 

साल 2026 के पहले 6 महीने में भारत में गोल्ड ज्वेलरी की कुल मांग 141 टन रही, जो पिछले साल के मुकाबले में 17% कम है. लेकिन सोने की ज्यादा कीमतों की वजह से इस मांग की कुल वैल्यू 26% से ज्यादा होकर 21 अरब डॉलर पहुंच गई.  यानी लोगों ने कम सोना खरीदा, लेकिन ज्यादा कीमत दिया. 

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पूरे दुनिया में अप्रैल-जून तीन महीने के दौरान सोने की कुल मांग करीब 1,269 टन रही, जो पिछले साल के बराबर है. गोल्ड ETF, गोल्ड बार और सिक्कों में इंवेस्टमेंट कम होकर 262 टन रह गया. गोल्ड बार और सिक्कों में इंवेस्टमेंट पहले 6 महीने में पिछले साल के मुकाबले 21% ज्यादा रहा. 

ये भी बताया गया कि केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं.अप्रैल-जून तीन महीने में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 289 टन सोना अपने स्टॉक में जोड़ा, जो पिछले साल के मुकाबले 62% ज्यादा है. भारत के रिजर्व बैंक ने भी इस दौरान 200 किलोग्राम सोना खरीदा.

आगे क्या रह सकता है ट्रेंड?

WGC का कहना है कि दूसरे 6 महीने मे इंवेस्टमेंट के लिए सोने की मांग ज्यादा हो गई है अगर सोने की कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो ज्वेलरी की खरीदारी पर दबाव रहेगा. ऐसे में लोग कम या हल्के ज्वेलरी खरीदना ही बेहतर ऑप्शन मान सकते हैं.

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