गलवान झड़प के बाद पहली बार शी जिनपिंग का भारत दौरा, नई दिल्ली और बीजिंग में हलचल


Xi Jinping India Visit: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आने की संभावना है. 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से यो उनकी पहली भारत यात्रा होगी. उस झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था. 

नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए जिनपिंग 12-13 सितंबर को भारत दौरे पर आ सकते हैं. बता दें कि लद्दाख सीमा पर तनाव के बाद सालों तक चले सैन्य गतिरोध के बाद भारत-चीन रिश्तों के धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में ये एक अहम पड़ाव होगा. शी जिनपिंग साल 2013 से कम्युनिस्ट देश के राष्ट्रपति हैं और अब तक वो 3 बार भारत आ चुके हैं. 

जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जो ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (LAC) पर सैन्य टकराव से कुछ महीने पहले हुई थी. इस टकराव ने दोनों देशों के रिश्तों को पूरी तरह से बदल दिया था. सूत्रों के मुताबिक, शी की प्रस्तावित यात्रा से पहले नई दिल्ली और बीजिंग के बीच राजनयिक बातचीत बढ़ने की उम्मीद है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के उच्च-स्तरीय बातचीत के लिए चीन जाने की संभावना है, हालांकि अभी तारीखें तय की जा रही हैं.

WMCC की बैठक होने की उम्मीद

आने वाले हफ्तों में भारत-चीन सीमा मामलों पर ‘कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन के लिए वर्किंग मैकेनिज्म’ (WMCC) की बैठक होने की भी उम्मीद है, जिसके बाद सीमा विवाद पर दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी. भारत-चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए सहमति बनने के बाद ये अपनी तरह की पहली बैठक होगी. 

6 साल में भारत का पहला दौरा करेंगे जिनपिंग 

अगर जिनपिंग का दौरा होता है तो ब्रिक्स समिट में शी की मौजूदगी का महत्व इस ग्रुपिंग से कहीं ज्यादा होगा. ये लगभग 6 साल में भारत का उनका पहला दौरा होगा. जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद पहली बार वे भारत आएंगे. इस दौरे पर सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या समिट के दौरान भारत और चीन के नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक होती है या नहीं. ऐसी बैठक में सीमा विवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और एशिया के सबसे अहम द्विपक्षीय रिश्तों में से एक के भविष्य की दिशा पर चर्चा होने की संभावना है.

ये बैठक और अहम इसलिए हो जाती है क्योंकि दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. इन चुनौतियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ से जुड़े कदम और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य दखल के बाद बढ़ी अस्थिरता शामिल है.

ये भी पढ़ें: ‘गाजा में हथियारों से मुक्त होगा हमास’, ट्रंप ने ऐतिहासिक समझौते का किया ऐलान



Source link

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*