Xप्लेन: E20 फ्यूल पर संसद में अलग-अलग जवाब! क्या खुद उलझ गई बीजेपी सरकार?


E20 पेट्रोल यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण पर नई उलझन पैदा हो गई है. इसे लेकर संसद में दो अलग-अलग मंत्रालयों के दो अलग-अलग जवाब सामने आए हैं. इससे भी बड़ा खुलासा तब हुआ जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि FCI 37 रुपए प्रति किलोग्राम में खरीदे चावल को 23 रुपए प्रति किग्रा में डिस्टिलरीज को बेच रही है. यह अंतर इतना साफ है कि आम आदमी के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार खुद ही समझ नहीं पा रही कि E20 आखिर है क्या…

लोकसभा में सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्या कहा?

30 जुलाई 2026 को लोकसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक लिखित जवाब में कहा, ‘E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक घट सकती है, जो गाड़ियों की कैटेगरी और उम्र पर निर्भर करता है.’

गडकरी ने यह भी कहा कि ARAI, SIAM और IOCL की स्टडी में E20 की वजह से इंजन फेल होने का कोई सबूत नहीं मिला है. उन्होंने दावा किया कि E20 से गाड़ी का एक्सक्लेरेशन बेहतर होता है, राइड क्वालिटी सुधरती है और E10 की तुलना में 30% कम कार्बन उत्सर्जन होता है. गडकरी ने आगे कहा कि 20 करोड़ से ज्यादा दोपहिया और 3 करोड़ से ज्दादा पेट्रोल कार पहले से ही इथेनॉल-मिक्स्ड ईंधन पर चल रही हैं. निर्माताओं के सर्विस डेटा में E20 से कोई असामान्य जंग, घिसाव या गाड़ियों की उम्र में कमी नहीं पाई गई.

राज्यसभा में सड़क परिवहन मंत्रालय ने क्या कहा?

एक दिन पहले (29 जुलाई 2026) राज्यसभा में भी गडकरी ने ही एक और जानकारी दी थी, ‘1 अप्रैल 2005 से 2016 के बीच बने BS-III पेट्रोल गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल से कुछ रबर के पुर्जे और गास्केट खराब हो सकते हैं.’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन पुर्जों को नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है और इंजन पर कोई असर नहीं पड़ता.

तीसरा जवाब: राज्यसभा (पेट्रोलियम मंत्रालय)

यह मामला 20 जुलाई 2026 को ही उलझ गया था, जब पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया, ‘पुराने E10-डिजाइन वाले वाहनों में ईंधन अर्थव्यवस्था में कमी आमतौर पर 3-5% तक सीमित है.’ यानी एक ही सरकार के दो मंत्रालय सड़क परिवहन और पेट्रोलियम मंत्रालय E20 से माइलेज में कमी को लेकर अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं. सड़क परिवहन ने कहा कि 2-6% माइलेज कम होगा, जबकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि 3-5% माइलेज कम होगा.

क्या कहती है रिपोर्ट?

गडकरी ने यह भी बताया कि ARAI, SIAM और IOCL ने मिलकर E20 का BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों पर असर की स्टडी की. इस अध्ययन में इंजन ड्यूरेबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी, फ्यूल सिस्टम, जंग प्रतिरोध, ड्राइवबिलिटी, उत्सर्जन और ईंधन अर्थव्यवस्था जैसे पहलुओं को कवर किया गया.

हालांकि, दिल्ली के मैकेनिक्स E20 से इंजन फेल होने के मामलों में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं बता रहे, लेकिन फ्यूल माइलेज में कमी की शिकायतें बढ़ी हैं. इसमें 5% से 30% तक की गिरावट बताई जा रही है.

जनता की जेब पर E20 का गणित क्या कहता है?

E20 का मामला सिर्फ माइलेज और इंजन तक सीमित नहीं है. इसकी आर्थिक लागत भी बड़ा सवाल खड़ा करती है.

चावल से इथेनॉल: FCI का 10,000 करोड़ का घाटा

सरकार ने राज्यसभा में बताया कि:

  • FCI ने चावल 3,720-3,889 रुपए प्रति क्विंटल (लगभग 37 रुपए प्रति किलो) में खरीदा था.
  • चावल इथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरीज को 2,250-2,320 रुपए प्रति क्विंटल (लगभग 23 रुपए किलो) में बेचा.
  • सरकार ने लगभग 40% घाटे पर चावल बेचा था.

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बताया कि FCI ने पिछले 12 महीनों के दौरान 6.35 मिलियन टन चावल डिस्टिलरीज को भेजा. इसकी कुल कीमत 14,596.78 करोड़ रुपए थी. इस प्रक्रिया से लगभग 10,000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है.

इसका सबसे ज्यादा 844,141 टन चावल हरियाणा की इथेनॉल डिस्टिलरीज को मिला. इसके बाद उत्तर प्रदेश (838,645 टन), पंजाब (658 टन), हिमाचल प्रदेश (952 टन) और पश्चिम बंगाल (584,672 टन) का नंबर आता है.

इथेनॉल पेट्रोल से महंगा, सब्सिडी कौन चुका रहा है?

केंद्र सरकार ने यह भी माना कि तेल कंपनियां इथेनॉल को पेट्रोल से ज्यादा महंगे दाम पर खरीद रही हैं. इसका मतलब साफ है कि E20 पेट्रोल सस्ता नहीं हो सकता. असल में E20 पेट्रोल की कीमत शुद्ध पेट्रोल से ज्यादा है.

केंद्र सरकार FCI को घाटे की भरपाई कर रही है और तेल कंपनियों को महंगा इथेनॉल खरीदने के लिए मुआवजा दे रही है. यह सब टैक्सपेयर की जेब से चुकाया जा रहा है. यानी जनता के टैक्स से सब्सिडी दी जा रही है और फिर वही जनता E20 पेट्रोल महंगा खरीद रही है.

फीडस्टॉक के मुताबिक, तेल कंपनियां इथेनॉल को लगभग 65 से 72 रुपए प्रति लीटर के प्रशासित मूल्य पर खरीदती हैं. जबकि पेट्रोल का प्री-टैक्स, रिफाइनरी-गेट मूल्य लगभग ₹53 प्रति लीटर है. यानी, इथेनॉल पेट्रोल से 20-35% ज्यादा महंगा है.

उदाहरण से समझें तो दिल्ली में E20 पेट्रोल का खुदरा मूल्य 102.12 रुपए प्रति लीटर है. इसमें डीलर कमीशन 4.45 और VAT 16.59 शामिल है. इस कीमत में इथेनॉल, पेट्रोल और ब्लेंडिंग की लागत अलग-अलग नहीं बताई जाती है.

बीजेपी सरकार ने खुद माना कि जब अंतरराष्ट्रीय क्रूड तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास होती है, तो E20 का उत्पादन शुद्ध पेट्रोल के बराबर या उससे ज्यादा महंगा होता है. E20 तभी सस्ता हो सकता है जब क्रूड तेल की कीमत 120-130 डॉलर प्रति बैरल या उससे ज्यादा हो जाए.



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